20 मई 2019 - 14:04
ईरान पर आतंकवाद के समर्थन का सऊदी अरब का आरोप, यानी उलटा चार कोतवाल को डांटे!

सऊदी अरब के विदेश राज्य मंत्री आदिल अलजुबैर ने राजधानी रियाज़ में एक पत्रकार सम्मेलन में एक बार फिर ईरान पर आरोप लगाया कि वह आतंकवाद का समर्थन कर रहा है और क्षेत्र में अस्थिरता फैला रहा है।

उन्होंने ईरान के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के वही रटे रटाए आरोप दोहराते हुए कहा कि ईरान आतंकवाद को बढ़ावा देता है, ईरान क्षेत्र के देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है। जुबैर ने कहा कि उनका देश इलाक़े में कोई युद्ध नहीं चाहता। उन्होंने यह दावा भी कर दिया कि सऊदी अरब तो शांति का पक्षधर है। अपने भ्रामक बयान में जुबैर ने कहा कि सऊदी अरब क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय परिवर्तनों को जो ईरान की गतिविधियों के कारण तनावपूर्ण हो ग हैं गहरी चिंता के साथ देखता है, ईरान की शासन व्यवस्था इलाक़े में शांति व स्थिरता नहीं चाहती।

सऊदी अरब और इमारात का मीडिया भी इमारात की अलफ़ुजैरा बंदरगाह पर और सऊदी अरब के भीतर तेल प्रतिष्ठानों पर होने वाले हमलों को आधार बनाकर ईरान के ख़िलाफ़ वातावरण बनाने की कोशिश में है। इमरात ने सऊदी अरब और नार्वे के साथ मिलकर सुरक्षा परिषद को एक पत्र लिखा है जिसमें ईरान के ख़िलाफ़ वातावरण बनाने की कोशिश की गई है।

इस पूरे ड्रामे में दो लक्ष्य बहुत साफ़ नज़र आते हैं। एक लक्ष्य यह है कि सुरक्षा परिषद को प्रयोग करते हुए ईरान के ख़िलाफ़ उत्तेजक कार्यवाही का रास्ता साफ़ किया जाए और दूसरा लक्ष्य सऊदी अरब की ओर से आतंकी संगठनों के समर्थन तथा यमन पर की जाने वाली बर्बरतापूर्ण बमबारी पर पर्दा डालना है।

यही ड्रामा इससे पहले भी रचा गया था और सुरक्षा परिषद की बैठक के अवसर पर अमरीका ने धातु के कुछ टुकड़े दिखाकर दावा किया था कि यह उन मिसाइलों के टुकड़े हैं जो ईरान ने यमन पहुंचाए हैं और यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन ने उन्हें सऊदी अरब पर फ़ायर किया है। अमरीका का ड्रामा भी पूरी तरह फ़्लाप रहा था।

ब्रिटिश पत्रकार पैट्रिक काकबर्न ने लिखा कि सऊदी अरब के अधिकारी अपनी समस्त आपराधिक कार्यवाहियों और के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश करते हैं। क्योंकि अगर आतंकवाद के समर्थन और अस्थिरता फैलाने की बात की जाए तो सऊदी अरब की विनाशकारी भूमिका सारी दुनिया के सामने है।

ईरान के विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद ज़रीफ़ भी कह चुके हैं कि एक बी टीम है जो इलाक़े में युद्ध करवाना चाहती है। बी टीम में चार लोग शामिल हैं जिनके नाम में अंग्रेज़ी के बी शब्द का प्रयोग होता है। जान बोल्टन, बीबी अर्थात ज़ायोनी प्रधानमंत्री नेतनयाहू, बिन सलमान और बिन ज़ाएद।

ईरान के ख़िलाफ़ आतंकवाद के समर्थन के आरोप एसी स्थिति में लगाए जा रहे हैं जब अमरीका और सऊदी अरब तथा उनके अन्य सहयोगी देशों की मदद से बनने वाले आतंकी संगठन दाइश की कमर तोड़ने में ईरान की केन्द्रीय भूमिका रही है।